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dilse_suresh
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rockssss
06/04/2008 13:05:55
were r u 4m
SCRAPBOOK
From:
rockssss
06/04/2008 13:05:50
were r u 4m
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From:
rockssss
06/04/2008 13:05:45
were r u 4m
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
28/02/2008 10:31:45
दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚
वैलेंटाइन डे
के मौके पर कà¥à¤›
अन'मोल शायरी
आप'के पà¥à¤¯à¤¾à¤° को बयाठमें आप'का साथ देगी !!!! इस'से आप'का काम शायद और आसानी से हो जाये और
आप'को आप'का पà¥à¤¯à¤¾à¤°
कि बेपनाह मोहबà¥à¤¬à¤¤ मिले !! ये आशा लिये मेरे तरफ़ से
वैलेंटाइन डे
के मौके पर आप के लिये कà¥à¤› अन'मोल सौगात, उमà¥à¤®à¥€à¤¦ है आप सब'को पसनà¥à¤¦ आयेगी .................
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
28/02/2008 10:31:18
जो खो जाता है मिल'कर ज़िंदगी में
गजल है नाम उस'का शाइरी में
निकल आते है आंसॠहंस'ते-हंस'ते
ये किस गम की कसक है हर खà¥à¤¶à¥€ में
कहीं चेह'रा, कहीं आंखें, कहीं लब
हमेशा à¤à¤• मिल'ता है क'ई में
चमक'ती है अंधेरों में खामोशी
सितारे टूटà¥à¤¤à¥‡ हैं रात ही में
सà¥à¤²à¤—'ती रेत में पानी कहां था
कोई बादल छà¥à¤ªà¤¾ था तिशà¥à¤¨'गी में
बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल है बंजारा मिजाजी
सलीका चाहिठआवार'गी में
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
28/02/2008 10:30:56
तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ शहर का मौसम सà¥à¤¹à¤¾à¤¨à¤¾ लगे
मैं इक शाम चà¥à¤°à¤¾ लूं अगर बà¥à¤°à¤¾ न लगे
जो डूब'ना तो इत'ने सà¥à¤•ूं से डूबो
कि आस-पास की लह'रों को पता न लगे
तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ बस में अगर हो तो à¤à¥‚ल जा हमें
तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡ à¤à¥‚ल'ने में शायद हमें जमाना लगे
हमारे पà¥à¤¯à¤¾à¤° से जल'ने लगी है इक दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾
दà¥à¤† करो कि दà¥à¤¶à¥à¤®à¤¨ की बदà¥à¤† न लगे
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
28/02/2008 10:30:31
चांद से फूल से या मेरी जà¥à¤¬à¤¾à¤¨ से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
हर जगह आप'का किसà¥à¤¸à¤¾ है जहां से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
सब'को आता नहीं दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को सजाकर जीना
ज़िनà¥à¤¦à¤—ी कà¥à¤¯à¤¾ है मोहबà¥à¤¬à¤¤ की जबां सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
कà¥à¤¯à¤¾ ज़रूरी है हर उठाया जाये
मेरे हालात à¤à¥€ अप'ने ही मकां से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
मेरी अवाज़ ही परà¥à¤¦à¤¾ है मेरे चेह'रे का
मैं हूं खामोश जहां से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
कौन पढ सक'ता पानी पे लिखे तह'रीरें
किस'ने कà¥à¤¯à¤¾ लिखा है ये आबे रवां से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
चादं में कैसे कैद हà¥à¤ˆ किसी घर की खà¥à¤¶à¥€
ये कहानी किसी मसà¥à¥›à¤¿à¤¦ की अंज़ा से सà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‡
__________________
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
28/02/2008 10:29:09
अकà¥à¤¸à¤° रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को रोते हà¥à¤ देखा है,
अपनों की ही बाà¤à¤¹à¥‹ में मरते हà¥à¤ देखा है
टूटते, बिखरते, सिसकते, कसकते
रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ का इतिहास,
दिल पे लिखा है बेहिसाब!
पà¥à¤¯à¤¾à¤° की आà¤à¤š में पक कर पकà¥à¤•े होते जो,
वे कब कौन सी आग में à¤à¥à¤²à¤¸à¤¤à¥‡ चले जाते हैं,
à¤à¥à¤²à¤¸à¤¤à¥‡ चले जाते हैं और राख हो जाते हैं!
कà¥à¤¯à¤¾ वे नियति से नियत घड़ियाठलिखा कर लाते हैं?
कौन सी कमी कहाठरह जाती है
कि वे असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µà¤¹à¥€à¤¨ हो जाते हैं,
या à¤à¤• अरसे की पूरà¥à¤£ जिनà¥à¤¦à¤—ी जी कर,
वे अपने अनà¥à¤¤à¤¿à¤® मà¥à¤•ाम पर पहà¥à¤à¤š जाते हैं!
मैंने देखे हैं कà¥à¤› रिशà¥à¤¤à¥‡ धन-दौलत पे टिके होते हैं,
कà¥à¤› चालबाजों से लà¥à¤Ÿà¥‡ होते हैं-गहरा धोखा खाठहोते हैं
कà¥à¤› आà¤à¤¸à¥à¤“ं से खारे और नम हà¥à¤ होते हैं,
कà¥à¤› रिशà¥à¤¤à¥‡ अà¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ में पले होते हैं-
पर à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¥‡ होते है! बड़े ही खरे होते हैं !
कà¥à¤› रिशà¥à¤¤à¥‡, रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की कबà¥à¤° पर बने होते हैं,
जो कà¤à¥€ पनपते नहीं, बहà¥à¤¤ समय तक जीते नहीं
दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ और दà¥à¤–ों के तूफान से बचते नहीं!
सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ पर बनें रिशà¥à¤¤à¥‡ बà¥à¤²à¤¬à¥à¤²à¥‡ की तरह उठते हैं
कà¥à¤› देर बने रहते हैं और गायब हो जाते हैं;
कà¥à¤› रिशà¥à¤¤à¥‡ दूरियों में ओà¤à¤² हो जाते हैं,
जाने वाले के साथ दूर चले जाते हैं !
कà¥à¤› नजदीकियों की à¤à¥‡à¤‚ट चढ़ जाते हैं,
कà¥à¤› शक से सà¥à¤¨à¥à¤¨ हो जाते हैं !
कà¥à¤› अतिविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ की बलि चढ़ जाते हैं!
फिर à¤à¥€ रिशà¥à¤¤à¥‡ बनते हैं, बिगड़ते हैं,
जीते हैं, मरते हैं, लड़खड़ाते हैं, लंगड़ाते हैं
तेरे मेरे उसके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ घसीटे जाते हैं,
कà¤à¥€ रसà¥à¤®à¥‹à¤‚ की बैसाखी पे चलाठजाते हैं!
पर कà¥à¤› रिशà¥à¤¤à¥‡ à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ हैं
जो जनà¥à¤® से लेकर बचपन जवानी - बà¥à¤¢à¤¼à¤¾à¤ªà¥‡ से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤,
बड़ी गरिमा से जीते हà¥à¤ महान महिमाय हो जाते हैं !
à¤à¤¸à¥‡ रिशà¥à¤¤à¥‡ सदियों में नजर आते हैं !
जब कà¤à¥€ सचà¥à¤šà¤¾ रिशà¥à¤¤à¤¾ नजर आया है
कृषà¥à¤£ की बाà¤à¤¸à¥à¤°à¥€ ने गीत गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ है!
आसमां में ईद का चाà¤à¤¦ मà¥à¤¸à¥à¤•राया है!
या सूरज रात में ही निकल आया है!
ईद का चाà¤à¤¦ रोज नहीं दिखता,
इनà¥à¤¦à¥à¤°à¤§à¤¨à¥à¤· à¤à¥€ कà¤à¥€-कà¤à¥€ खिलता है!
इसलिठशायद - पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ खरा रिशà¥à¤¤à¤¾
सदियों में दिखता है, मà¥à¤¶à¥à¤•िल से मिलता है पर,
दिखता है, मिलता है, यही कà¥à¤¯à¤¾ कम है .. !!!
SCRAPBOOK
From:
dilse_suresh
03/02/2008 08:12:53
$UR3$H Y@D@V
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