दोहे
मेरी à¤à¤µ बाधा हरौ, राधा नागरि सोय।
जा तनॠकी à¤à¤¾à¤à¤ˆ परे, सà¥à¤¯à¤¾à¤® हरित दà¥à¤¤à¤¿ होय॥
अधर धरत हरि के परत, ओंठ, दीठ, पट जोति।
हरित बाà¤à¤¸ की बाà¤à¤¸à¥à¤°à¥€, इंदà¥à¤° धनà¥à¤· दà¥à¤¤à¤¿ होति॥
या अनà¥à¤°à¤¾à¤—ी चितà¥à¤¤ की, गति समà¥à¤à¥ˆ नहिं कोइ।
जà¥à¤¯à¥‹à¤‚-जà¥à¤¯à¥‹à¤‚ बूड़ै सà¥à¤¯à¤¾à¤® रंग, तà¥à¤¯à¥‹à¤‚-तà¥à¤¯à¥‹à¤‚ उजà¥à¤œà¤²à¥ होइ॥
पतà¥à¤°à¤¾ ही तिथी पाइये, वा घर के चहà¥à¤ पास।
नित पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पूनà¥à¤¯à¥Œ ही रहे, आनन-ओप उजास॥
कहति नटति रीà¤à¤¤à¤¿ मिलति खिलति लजि जात।
à¤à¤°à¥‡ à¤à¥Œà¤¨ में होत है, नैनन ही सों बात॥
नाहिंन ये पावक पà¥à¤°à¤¬à¤², लूà¤à¤‚ चलति चहà¥à¤ पास।
मानों बिरह बसंत के, गà¥à¤°à¥€à¤·à¤® लेत उसांस॥
इन दà¥à¤–िया अà¤à¤–ियान कौं, सà¥à¤– सिरजोई नाहिं ।
देखत बनै न देखते, बिन देखे अकà¥à¤²à¤¾à¤¹à¤¿à¤‚॥
सोनजà¥à¤¹à¥€ सी जगमगी, अà¤à¤—-अà¤à¤— जोवनॠजोति।
सà¥à¤°à¤à¤— कà¥à¤¸à¥à¤‚à¤à¥€ चूनरी, दà¥à¤°à¤à¤—ॠदेहदà¥à¤¤à¤¿ होति॥
बामा à¤à¤¾à¤®à¤¾ कामिनी, कहि बोले पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡à¤¸à¥¤
पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ कहत लजात नहीं, पावस चलत बिदेस॥
गोरे मà¥à¤– पै तिल बनà¥à¤¯à¥‹, ताहि करौं परनाम।
मानो चंद बिछाइकै, पौà¥à¥‡ सालीगà¥à¤°à¤¾à¤®à¥¥
मैं समà¥à¤à¥à¤¯à¥‹ निराधार, यह जग काचो काà¤à¤š सो।
à¤à¤•ै रूप अपार, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤®à¥à¤¬à¤¿à¤¤ लखिठतहाà¤à¥¥
- बिहारी