|
|
Dosti
Posted On: 11/10/2007 12:06:50
|
à¤à¤¸à¤¾ दोसà¥à¤¤ चाहिठजो हमे अपना मान सके, जो हमारा दिल को जान सके, चल रहा हो हम तेज़ बेरिश मे, फिर à¤à¥€ पानी मे से आà¤à¤¸à¥à¤“ को पहचान सके!!!!
ख़à¥à¤¶à¥à¤¬à¥‚ की तरह मेरी सांसो मे रेहाना…… लहू बनके मेरी नसनस मे बेहाना, दोसà¥à¤¤à¥€ होती है रिसà¥à¤¤à¥‹ का अनमोल गेहना………..******* इसलिया इस दोसà¥à¤¤à¥€ को कà¤à¥€ अलविदा ना कहना.***********
याद आठकà¤à¥€ तो आà¤à¤–ें बंद मत करना.................
हम ना à¤à¥€ मिलें तो गम मत करना!!!! ज़रूरी तो नही के हम नेट पेर हैर रोज़ मिलें मगर ये दोसà¥à¤¤à¥€ का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ कà¤à¥€ कम मत करना.......................
दोसà¥à¤¤à¥€ उन से करो जो निà¤à¤¾à¤¨à¤¾ जानते हो............... नफ़रत उन से करो जो à¤à¥‚लना जानते हो................ ग़à¥à¤¸à¥à¤¸à¤¾ उन से करो जो मानना जनता हो........... पà¥à¤¯à¤¾à¤° उनसे करो जो दिल लà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¤¾ जनता हो.................***
बहते अशà¥à¤•ो की ज़à¥à¤¬à¤¾à¤¨ नही होती, लफ़à¥à¤œà¤¼à¥‹à¤‚ मे मोहबà¥à¤¬à¤¤ बयां नही होती, मिले जो पà¥à¤¯à¤¾à¤° तो कदर करना, किसà¥à¤®à¤¤ हर कीसी पर मेहरबां नही होती.
|