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Ajnabi shehar ke ajnabi raaste(shruviis)
Posted On 14/10/2008 06:00:40 by shruvii
अजनबी शहर के अजनबी रास्ते , मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे में बुहत देर तक यूँही चलता रह, तुम बुहत देर तक याद आते रहे. ज़हर मिलता रह ज़हर पीते रहे , रोज़ मरते रहे रोज़ जीते रहे, ज़िंदगी भी हमे आजमाती रही , और हम भी उसे आजमाते रहे . ज़ख्म जब भी कोई जहन-ओ-दिल पेर लगा , ज़िंदगी की तरफ एक दरीचा खुला, हम भी गोया किसी साज़ के तार हैं , चोट खाते रहे गुन-गुनते रहे. कल कुछ ऐसा हुआ में बहोत तक गया, इस लिए सुने के भी उन्सुनी कर गया, कितनी यादों के भटके हुआ कारवां , दिल के ज़ख्मों के दर खट-खटते रहे. **** जहन/zahen=mind दरीचा/dareecha = window गोया/goya=singer, to say in certain manner (not clear about this)

Tags: Lyrics Rahi Masoom Raza



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